Bhil caste festivals, culture, food, occupation in hindi | भील जाति का इतिहास

भील जाति का इतिहास 

Bhil caste मध्य भारत में पाए जाने वाली एक जनजाति है। यह जनजाति भारत के सर्वाधिक क्षेत्र में फैली हुई है। प्राचीन समय में भील जाति के लोग मिस्र से लेकर श्रीलंका तक फैले हुए थे। भील जाति के लोग बोलचाल के लिए भील भाषा का इस्तेमाल करते हैं। भील जाति वालों को भारत का बहादुर धनुष पुरुष कहा जाता है।

प्राचीनतम समय में भील जाति वालों की गणना राजवंशों में की जाती थी। जो उस समय विहिल वंश के नाम से प्रसिद्ध थे। विहिल वंश का शासन पहाड़ी इलाकों में हुआ करता था। जिनका शासन दक्षिण राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र ओडिशा मालवा में था। 

भील जनजाति भारत के राजस्थान महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश गुजरात में एक अनुसूचित जनजाति में आते हैं। ऐसा माना जाता है की अजमेर में स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के खादिम भीड़ पूर्वजों के वंशज थे। भील जनजाति के लोग पाकिस्तान के सिंध तथा त्रिपुरा के क्षेत्रों में भी बसे हुए हैं। 

Bhil caste के लोगों का पहनावा

Bhil caste के लोग निम्न प्रकार के परिधानों को ग्रहण करते है –

पुरुषों द्वारा पहने जाने वाले वस्त्र  :-

पोत्या :- पोत्या सिर पर पहने जाने वाले सफेद साफे या पगड़ी  को कहा जाता हैं।

फेंटा :- फेंटा सिर पर बान्धे जाने वाला लाल/पीला/केसरिया साफा (पगड़ी की तरह ) कहलाता हैं।

फालू :-फालू कमर में बांधे जाने वाला अंगोछा होता  हैं।

ढेपाड़ा :- भील पुरुषों द्वारा कमर से घुटनों तक पहने जाने वाले तंग धोती को ढ़ेपाड़ा कहते है ।

खोयतू :- खोयतू कमर में पहन जाने वाला वस्त्र है इसे लंगोटी भी कहा जाता हैं।

बंडी/कमीज/अंगरखी/कुर्ता :- शरीर के ऊपरी हिस्से पर पहना जाने वाला वस्त्र।

स्त्रियों द्वारा पहने जाने वाले वस्त्र :-

सिंदूरी :- लाल रंग की साड़ी को सिन्दूरी कहा जाता है जिसे स्तरीय पहनती है ।

पिरिया :- पिरिया मुख्या रूप से भील जाति में दुल्हन द्वारा पहना जाता है यह पीले रंग का होता हैं। 

कछाबू :- यह स्त्रियों द्वारा घुटनों तक पहना जाने वाला घाघरा होता है जिसे  ‘कछाबू’ कहलाता हैं।

लूगड़ा :-लूगड़ा को ओढ़नी भी कहा जाता हैं जो भील  जनजाति की  स्त्रियों द्वारा पहनी जाने वाली साड़ी होती हैं। भील जाती की स्त्रियों द्वारा ओढ़ी जाने वाली लोकप्रिय ओढ़नी ‘तारा भांत की ओढ़नी’ हैं।

परिजनी :- परिजनी पीतल की मोती चूडिया होती है जिसे भील जाती की औरते पैरो में पहनती है

Bhil caste के त्यौहार 

भील जनजाति द्वारा कई प्रकार के त्यौहार मनाये जाते है जैसे राखी, नवरात्री, दसहरा, दीवाली, होली। भील जाती के लोग अन्य त्यौहार जैसे आखातीज, नवमी, होवन माता की चलावनी, सावन माता की जातर, दिवासा, नवाई, भगोरिया, गलगर, ढोबी, संजा, इंदल, डोह  आदि। 

Bhil caste के लोगो का व्यवसाय 

अधिकांश भील किसान हैं। हालांकि, निर्वाह कृषि के दबाव, गैर-आर्थिक भूमि जोत, कर्ज के बोझ और लगातार सूखे ने कई भीलों को जमीन छोड़ने और अन्य व्यवसायों की ओर रुख करने के लिए मजबूर किया है।

Bhil caste वालो का भोजन 

Bhil caste पारंपरिक रूप से सर्वाहारी होते हैं। भील जनजाति  के मुख्य खाद्य पदार्थ मक्का , प्याज , लहसुन और मिर्च हैं।  जिन्हे भील जनजाति के लोग अपने छोटे खेतों में खेती करते हैं। भील जनजाति के लोग  स्थानीय जंगलों से फल और सब्जियां भी एकत्र करते हैं। त्योहारों और अन्य विशेष अवसरों पर ही भील जनजाति के लोग गेहूं और चावल का उपयोग करते है।

Bhil caste के लोग  स्व-निर्मित धनुष और तीर, चाकू, गोफन, भाला, कुल्हाड़ी, तलवार, इत्यादि को अपने रक्षा के लिए हथियार के रूप में रखते हैं और इनका उपयोग जंगली जीवों का शिकार करने के लिए भी करते  हैं। भील जनजाति के लोग  महुआ के फूल से बनाए गये  शराब का उपयोग करते हैं। त्यौहारों के अवसर पर पकवानों से भरपूर विभिन्न प्रकार की खाने की चीजें तैयार  करते हैं । 

Bhil caste वालो के नृत्य और उत्सव

 Bhil caste के लोगो के लिए मनोरंजन का मुख्य साधन लोक गीत और नृत्य हैं। भीलजाति की  महिलाएं जन्म के  उत्सव पर नृत्य करती हैं।  कुछ उत्सवों पर ढोल की थाप का उपयोग  करती हैं। भील जनजाति के लोगो द्वारा  किये जाने वाले नृत्यों में लाठी नृत्य, गवरी/राई, गैर, द्विचकी, हाथीमना, घुमरा, ढोल नृत्य, विवाह नृत्य, होली नृत्य, युद्ध नृत्य, भगोरिया नृत्य, दीपावली नृत्य और शिकार नृत्य शामिल हैं।

  भील जनजाति द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले  वाद्ययंत्रों में हारमोनियम , सारंगी , कुंडी, बाँसुरी , अपांग, खजरिया, तबला , जेहंझ , मंडल और थाली शामिल हैं। इनके वाद्य यन्त्र सामन्यता स्थानीय सामने से  बने  होते है। 

Bhil caste वालो के लोकगीत 

भील जनजाति के लोग मुख्य रूप से लोकगीत गाते है जैसे सुवंटिया स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला लोकगीत है और .हमसीढ़ो- भील स्त्री व पुरूष दोनों के दवारा  द्वारा युगल रूप में गया जाने वाला लोकगीत है। 

भील जाति के लोगों का पहनावा क्या है ?

पोत्या :- पोत्या सिर पर पहने जाने वाले सफेद साफे या पगड़ी  को कहा जाता हैं।
फेंटा :- फेंटा सिर पर बान्धे जाने वाला लाल/पीला/केसरिया साफा (पगड़ी की तरह ) कहलाता हैं।
फालू :-फालू कमर में बांधे जाने वाला अंगोछा होता  हैं।
ढेपाड़ा :- भील पुरुषों द्वारा कमर से घुटनों तक पहने जाने वाले तंग धोती को ढ़ेपाड़ा कहते है ।
खोयतू :- खोयतू कमर में पहन जाने वाला वस्त्र है इसे लंगोटी भी कहा जाता हैं।
बंडी/कमीज/अंगरखी/कुर्ता :- शरीर के ऊपरी हिस्से पर पहना जाने वाला वस्त्र।

सिंदूरी :- लाल रंग की साड़ी को सिन्दूरी कहा जाता है जिसे स्तरीय पहनती है ।
पिरिया :- पिरिया मुख्या रूप से भील जाति में दुल्हन द्वारा पहना जाता है यह पीले रंग का होता हैं। 
कछाबू :- यह स्त्रियों द्वारा घुटनों तक पहना जाने वाला घाघरा होता है जिसे  ‘कछाबू’ कहलाता हैं।
लूगड़ा :-लूगड़ा को ओढ़नी भी कहा जाता हैं जो भील  जनजाति की  स्त्रियों द्वारा पहनी जाने वाली साड़ी होती हैं। भील जाती की स्त्रियों द्वारा ओढ़ी जाने वाली लोकप्रिय ओढ़नी ‘तारा भांत की ओढ़नी’ हैं।
परिजनी :- परिजनी पीतल की मोती चूडिया होती है जिसे भील जाती की औरते पैरो में पहनती है .

और पढ़े –
सट्टा मटका से कमाए करोड़ो रूपये जाने क्या है ये सट्टा मटका। .
बीजेपी के 60 घोटाले की लिस्ट 
कौन है  देशभक्त पुश्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ  इनका जीवन परिचय 
जाने वेगन  मिल्क से सम्बंधित विवाद की सम्पूर्ण जानकारी 
कही आपको तो  ब्रैस्ट कैंसर नहीं पढ़िए इन  लक्षणों को 
अंडाशय कैंसर के लक्षण आप भी जान के रखिये। ..
कोरोना से भी खतरनाक है जीका वायरस जाने इसके बारे में 
कही आप भी डिप्रेशन के शिकार तो नहीं लक्षण पढ़े 
सबसे  ज्यादा खतरनाक वायरस है ये एबोला वायरस जाने इसके बारे में। ..
राहुल गाँधी के बारे में ये नहीं जानते होंगे आप पढ़ने के लिए क्लिक करे। …
सोनू सूद के बारे में ये बाते नहीं जानते होंगे आप जानने के लिए पढ़िए। ..
 क्या आप जानते है रामनाथ कोविंद की जाति जिसकी वजह से उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया था। 
क्या आप जानते है कोली जाती के बारे में ? यहाँ पढ़े। …
क्या आप जानते है ये राइडर गर्ल विशाखा फूलसुंगे कौन है ? जान्ने के लिए क्लिक करे। …
कीर्ति शेट्टी जीवन परिचय फोटोज बॉयफ्रेंड 

भील जाति के त्यौहार  क्या है ?

राखी, नवरात्री, दसहरा, दीवाली, होली। भील जाती के लोग अन्य त्यौहार जैसे आखातीज, नवमी, होवन माता की चलावनी, सावन माता की जातर, दिवासा, नवाई, भगोरिया, गलगर, ढोबी, संजा, इंदल, डोह  आदि 

भील जाति वालो का भोजन  क्या है ?

र्थ मक्का , प्याज , लहसुन और मिर्च महुआ के फूल से बनाए गये  शराब।

भील जाति वालो के नृत्य और उत्सव क्या है ?

नृत्यों में लाठी नृत्य, गवरी/राई, गैर, द्विचकी, हाथीमना, घुमरा, ढोल नृत्य, विवाह नृत्य, होली नृत्य, युद्ध नृत्य, भगोरिया नृत्य, दीपावली नृत्य और शिकार नृत्य शामिल हैं।

भील जाति वालो के संगीत क्या है ?

वाद्ययंत्रों में हारमोनियम , सारंगी , कुंडी, बाँसुरी , अपांग, खजरिया, तबला , जेहंझ , मंडल और थाली शामिल हैं।

भील जाति वालो के लोकगीत  क्या है ?

सुवंटिया स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला लोकगीत है और .हमसीढ़ो- भील स्त्री व पुरूष दोनों के दवारा  द्वारा युगल रूप में गया जाने वाला लोकगीत है। 

भील जाति के लोगो का व्यवसाय  क्या है ?

अधिकांश भील किसान हैं

Leave a Comment